एक रात का खेल: अनजान लड़की के साथ
क्लब में भीड़ बहुत थी। मैं बार पर खड़ा ड्रिंक पी रहा था तभी नज़रें एक लड़की से मिलीं। काली शॉर्ट ड्रेस, लंबे बाल, तेज़ नज़रें। उसने मुस्कुरा दिया। मैंने पास जाकर सिर्फ इतना कहा —
“यहाँ से निकलें?”
उसने सिर हिलाया। नाम नहीं पूछा, न ही उसने मेरा नाम पूछा। बाहर निकलकर हमने एक होटल का कमरा लिया। लिफ्ट में ही उसने मेरा कॉलर पकड़कर जोर से चूम लिया।
कमरे में घुसते ही दरवाज़ा बंद होते ही उसने अपना ड्रेस नीचे गिरा दिया। अंदर सिर्फ काला लेस ब्रा और पैंटी थी। मैंने उसे दीवार से सटाया और उसके स्तनों को जोर से मसलने लगा। ब्रा खोलते ही उसके भारी स्तन बाहर आ गए। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और दांतों से हल्का काट लिया।
“आह… और जोर से…” उसने कहा।
मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। पैंटी खींचकर फेंक दी। उसकी चूत पहले से चमक रही थी। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया। क्लिट को चूसा, उंगलियाँ अंदर डालकर तेजी से हिलाईं। लड़की की कमर बार-बार उठ रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे ऊपर खींचा और मेरा पेंट नीचे किया। मोटा लंड हाथ में लेते ही उसकी आँखें चमक उठीं। उसने लंड को मुँह में ले लिया और गले तक उतारने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुँह में धक्के मारने शुरू कर दिए। ग्लक-ग्लक की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। थूक उसके मुँह से बहकर ठुड्डी और स्तनों तक पहुँच गया।
मैंने उसे लिटाया, पैर चौड़े किए और एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। उसकी जोरदार चीख निकली।
“उफ़्फ़… इतना मोटा… अब रुकना मत…”
मैंने दोनों पैर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के पर उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उसके गाल पर थप्पड़ मारा तो उसने और जोर से कराहना शुरू कर दिया।
फिर मैंने उसे डॉगी बना दिया। बाल कसकर पकड़े और पीछे से बेतहाशा पेलने लगा। एक हाथ से उसकी कमर दबाई और दूसरे से क्लिट रगड़ रहा था। लड़की के मुँह से सिर्फ गंदी आवाज़ें निकल रही थीं।
“और जोर से… तोड़ डाल… आज सिर्फ मज़ा चाहिए…”
मैंने उसके बाल और कसकर खींचे और थप्पड़ की बौछार कर दी। फिर उसे ऊपर बिठा लिया। वह मेरे लंड पर बैठकर पागलों की तरह उछलने लगी। उसके स्तन मेरे चेहरे पर जोर-जोर से लग रहे थे। मैंने दोनों को पकड़कर काटा और चूसा।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे फिर से लिटाया। पैर कंधों पर रखे और फुल स्पीड पर पेलते हुए पूछा —
“कहाँ छोड़ूं?”
उसने हांफते हुए जवाब दिया —
“अंदर… आज कंडोम नहीं… पूरा अंदर छोड़…”
मैंने आखिरी बहुत जोरदार धक्के मारे और पूरा गरम वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। लड़की का शरीर जोरों से कांपने लगा। उसकी जाँघें काँप रही थीं और वीर्य धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था।
दोनों पसीने से लथपथ लेटे थे। कुछ देर बाद उसने सिगरेट जलाई और धीरे से बोली —
“नाम मत पूछना। सुबह होते ही मैं चली जाऊँगी। लेकिन अभी… एक राउंड और।”