पत्नी को दूसरे के साथ देखना: मेरी छुपी हुई हवस
मैंने खुद अपनी पत्नी को दूसरे मर्द के साथ सोने के लिए कहा। दरवाज़े के पीछे से सब देखता रहा। जो मज़ा आया वो काल्पनिक नहीं था।
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मैंने खुद अपनी पत्नी को दूसरे मर्द के साथ सोने के लिए कहा। दरवाज़े के पीछे से सब देखता रहा। जो मज़ा आया वो काल्पनिक नहीं था।
रिया ने ब्रा उतारी तो आरव का लंड पहले से ही तंबू बना चुका था। रात भर चली वो कामुक लड़ाई, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे को पूरी तरह चखा।
पंखे की आवाज़ में दबी चीखें। प्रिया की साड़ी पहले ही कमर तक उठी हुई थी और रोहन उसके अंदर बेतहाशा धक्के मार रहा था।
रूममेट घर गया था। उसकी बहन मेरे कमरे में आई और दरवाज़ा बंद करते ही बोली – आज रात यहीं रुकोंगी। फिर जो हुआ वो हॉस्टल की दीवारें भी सुन नहीं सकतीं।
सभी कर्मचारी जा चुके थे। मैनेजर ने कैबिन में बुलाया और दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर जो ओवरटाइम हुआ वो काम से जुड़ा नहीं था।
पति ऑफिस ट्रिप पर था। उसकी बीवी ने दरवाज़ा खोला तो मैं हैरान रह गया। साड़ी में लिपटी वो औरत आज पूरी तरह खुलने वाली थी।
वह पहली बार थी। डर भी था और हवस भी। जब पूरा अंदर गया तो उसकी आँखों में आँसू और मज़े दोनों एक साथ थे।
पति गाँव गया था। ससुराल में सिर्फ मैं और देवर बचे थे। रात भर जो हुआ वो किसी को पता नहीं चलना चाहिए।
उसने मेरी आँखों पर पट्टी बाँधी, हाथ बाँधे और बोली – आज तुम मेरे गुलाम हो। फिर पूरी रात सिर्फ उसके हुक्म चलते रहे।
सभी चले गए थे। सिर्फ मैं और मेरी बॉस कैबिन में बचे थे। उसने स्कर्ट ऊपर की और टेबल पर बैठते हुए इशारा किया।
क्लब में नज़रें मिलीं। नाम तक नहीं पूछा। होटल के कमरे में जाते ही कपड़े उतरने लगे। सिर्फ एक रात का गंदा और बेकाबू खेल।
लिफ्ट में नज़रें मिलीं। उसने मुस्कुराते हुए अपना फ्लैट नंबर बताया। रात को जब दरवाज़ा खोला तो अंदर सिर्फ हवस बाकी थी।
रात के अंधेरे में पड़ोसी की बीवी ने दरवाज़ा खोला। साड़ी में भीगे शरीर और आँखों में छुपी हवस ने सब कुछ बता दिया।
रूममेट घर गया था। उसकी बहन मेरे कमरे में आई और दरवाज़ा बंद करते ही बोली – आज रात यहीं रुकोंगी। फिर जो हुआ वो हॉस्टल की दीवारें भी सुन नहीं सकतीं।
उसने मेरा बाल पकड़कर खींचा और बोली – आज नर्मियत नहीं चलेगी। फिर जो हुआ वो सिर्फ गंदी और ज़ोरदार सेक्स था।
घर में कोई नहीं था। भाभी रसोई में काम कर रही थीं। साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था। फिर जो हुआ वो दोपहर की गर्मी से भी ज्यादा गर्म था।