ऑफिस की रात: बॉस की टेबल पर
रात के दस बज चुके थे। ऑफिस में सिर्फ हम दो बचे थे। मेरी बॉस शालिनी ने कैबिन का दरवाज़ा बंद किया और पर्दा गिरा दिया।
उसने अपनी फॉर्मल शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। काला लेस ब्रा नज़र आने लगा। फिर स्कर्ट ऊपर करके टेबल पर बैठ गई।
“आज देर तक रुकना पड़ेगा… काम के बदले मज़ा ले लो,” उसने आँखें मिलाते हुए कहा।
मैंने पास जाकर उसके घुटनों को अलग किया। पैंटी पहले से गीली थी। मैंने पैंटी साइड में सरकाई और जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। शालिनी की कमर टेबल पर उठने लगी।
थोड़ी देर बाद उसने मेरा पेंट खोला और मोटा लंड निकालकर मुँह में ले लिया। कैबिन में ग्लक-ग्लक की आवाज़ गूँजने लगी। उसने गले तक लंड उतार लिया।
फिर वह टेबल पर लेट गई और पैर फैला दिए। मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया। शालिनी की दबी चीख निकली।
“उफ़्फ़… जोर से… आज कोई नहीं है…”
मैंने उसके दोनों पैर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। टेबल हिल रही थी। उसके स्तन ब्रा से बाहर आने को थे। मैंने ब्रा खींचकर निप्पल मुँह में ले लिए और चूसने लगा।
पोज़िशन बदलकर मैंने उसे टेबल से उतारा और खिड़की के पास खड़ा करके पीछे से पेलने लगा। एक हाथ से उसके बाल पकड़े हुए थे।
आखिर में उसने कहा —
“अंदर मत छोड़ना… मुँह में देना।”
मैंने लंड निकाला और उसके मुँह में डाल दिया। पूरा गरम वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया। शालिनी ने सब निगल लिया।
दोनों हांफ रहे थे। शालिनी ने शर्ट के बटन बंद करते हुए कहा —
“कल फिर लेट बैठना… प्रमोशन की बात करनी है।”